Pspcl वाले क्या हालत करते हैं बंदे की देखो जरा। बठिंडा में तो कुछ ज्यादा हो आग लगा रखी हैं इन्होंने।

मैंने सेकड़ों बार pspcl वालों को सीधा किया है। लेकिन यह कुत्ते की दुम हैं। इनका सुधार न हुआ।

एक बठिंडा वासी कैसे दुखी हुआ अपनी बात बता रहा है। उसकी रीक्वेस्ट/लेटर सिर्फ यह थी की उसकी प्रापर रीडिंग लेकर उसको बिल देना शुरू कर दें। वही नहीं करते यह। न लॉक डाउन से पहले, न बाद में।

हैलो बठिंडा!