शहर से दूर कोलोनिएस में रहने के फ़ायदे नुकसान

अगर आप थोड़ा अकेले रहने के आदी हो, या आपके पास ख़ुद की कार हमेशा रहेगी।

अगर बाज़ार से समान या तो आप पूरे महीने की लिस्ट बनाकर एक ही बार ख़रीद लेते हैं।

और अगर आपके रिश्तेदार भी ट्रेन बस से ना आकर ख़ुद की कार से ही आते हैं (या उनको स्टेशन से कॉलोनी तक लाने और छोड़ने का आपके पास कोई अच्छा साधन है)।

अगर आप इस नेचर के बंदे नहीं हो कि अभी बाज़ार जाने का मन हुआ तो अभी के अभी ही खरीदनी है अपनी जरूरत की आइटम।

अगर किसी खुशी या गमी के मोके पर आपको यह लगता है की जितने कम लोग आएंगे, उतना ही फाइदा।

अगर आपके बच्चे ट्यूशन पर नहीं जाते। (अगर आप सोचते हैं की उनके पास vehicle हैं और इसलिए कोई फर्क नहीं पड़ेगा, तो अच्छे से सोचिएगा और खुद को धोखा न दीजिएगा, अगर आपके बच्चे के पास Activa है, और आपके घर के नजदीक एक टीचर/ट्यूटर है। और दूसरी और वही क्वालिटी वाला, लेकिन कम रेट पर, क्वालिटी वही, लेकिन शहर के दूसरी और, तो आप उसको कहाँ लगवाएंगे: नजदीक या दूर?)

अगर इन बातों का जबाब हाँ है तो ही आप शहर से दूर colonies में घर ले लेना ।

वर्ना अगर आप शहर के अंदर पंचवटी, वीर कॉलोनी, नई बस्ती, यहाँ तक कि Multania रोड आदि इलाके में लो।

वर्ना मुझे लगता है कि दूर जाने के नुकसान बहुत ज्यादा हैं।
फ़ायदे (खुली हवा, रेट में सस्ते, भीड़ भड़के से दूर) बहुत ही थोड़े हैं।

अब हम शहर के बीचो बीच रएहते हैं। कार रखने के लिए आसपास कोई न कोई ओपन जगह भी मिल जाती है।
अगर कुछ काम करते हुए कुछ लाना पड़ गया तो 5 मिनट के अंदर वो आ जाता है।

जैसे कि कुछ दिन पहले दोपहर में पूरी गर्मी में कूलर का पंप ख़राब हो गया।
मैं दो मिनट में स्कूटर की किक मारी और पम्प पकड़ लाया।

कुछ कम्प्युटर के साथ पंगे ले रहा हूँ। उसमें किसी तार की जरूरत पड़ गयी। पुर्जा 5 रूपीस का ही है। लेकिन अगर आप दूर कोलोनिएस में रहते हैं, तो आपको वो काम उस वक़्त छोड़ना पड़ेगा और नैक्सट बाज़ार के चक्कर के वक़्त के लिए लिस्ट में नोट करना पड़ेगा। लेकिन अगर आप शहर के अंदर रहते हैं तो उसी वक़्त वो काम निपटा कर आएंगे।

अभी हमारे पड़ोस की एक फॅमिली दूर मशहूर कॉलोनी में गयी है, कुछ ही महीने पहले। नाम नहीं लूँगा की कौन गया है और किस कॉलोनी में।

कल उनके घर में किसी की डैथ हो गयी। आप यकीन नहीं मानेगे, उनके शहर वाले घर के मुक़ाबले सिर्फ 10% लोग कॉलोनी में उनके पास गए। बाकी सभी शहर में ही शमशान घाट पर आए और वापिस चले गए। अब मुझे पूरा यकीन है की उनको समझ आ गया होगा की उनकी दादी क्यूँ श्हर से उनको बाहर जाने से रोक रही थी। और यह भी यक़ीन है की भोग शहर के अंदर ही रखा जाएगा।

अगर महीन कहीं पर गलत कह रहा हूँ तो नीचे रिप्लाइ करके बताइएगा जरूरा।

बॉबी ज़ोफन

एडिट1: आज जो श्हर के बाहर है, 20 वर्ष बाद उसी ने शहर का अंदर बन जाना होता है। लेकिन तब तक एक जेनेरेशन निकाल चुकी होती है।

2 Likes

हैलो बठिंडा!