निपुण जैन पर केस क्यूँ हुआ, बावे पर क्यूँ नहीं? लॉजिक यह है।

रंजीत बावा तथा निपुण जैन के केस में बहुत फ़र्क है? क्यूँ निपुण पर केस हो गया, बाबे पर नहीं?

एक तो इंडिया का कानून इतना ज्यादा स्लो हो चुका है, की उसकी कोई अहमियत सी ही नहीं रह गई है।
पुलिस किसी पर कोई भी केस डाल दे, और बाद में …

हैलो बठिंडा!