रोज़ गार्डन के टूटे झूले


कार्पोरेशन को सिरफ और सिरफ पैसे खर्चने आते हैं। जो चीज़ बनवायी है, उसकी maintainance और उसको चोरी होने से बचाना, कोई नहीं चाहता।

क्यूँकि पहले वाला जाएगा तो ही नए बिल डललेंगे।

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हैलो बठिंडा!