लोग कुछ करने से पहले यह क्यूँ सोचते हैं की सामने वाले का उसमें क्या फ़ायदा हो रहा है?

मैंने यह अक्सर देखा है की लोग कुछ भी करने से पहले यह सोचते हैं की उनके इस कदम से सामने वाले का क्या और कितना फ़ायदा हो रहा है? Jealousy उनके हर कदम को निर्धारित करती है।

चैन मार्केटिंग के काम में, जब कोई seller किसी के पास जाता है तो लोग यह सोचते हैं की इसका फ़ायदा है, तो ही यह आया है। 50% वो इसी बात से नेगेटिव हो जाते हैं। लेकिन वो यह नहीं सोचते की अगर इसके फ़ायदे के कारण यह आया है तो हम भी किसी के पास यूं जाकर अपना फ़ायदा कर सकते हैं, या कर लेंगे। प्रॉडक्ट और प्लान चेक जरूर करना चाहिए। लेकिन जेयलौसी को साइड पर रख कर।

इसी तरह, हमारे इस वैबसाइट पर बहुत लोग इसलिए पोस्ट नहीं डालते, की इसमें कहीं इंका वैबसाइट प्रोमोट न हो जाये। वो यह नहीं सोचते की इससे उनको, उनके msg को फ्री में कितनी ज्यादा आडियन्स फ्री में मिल रही है, या मिलेगी?

और हरेक को मालूम है की जब कोई काम करता है, काम चल रहा होता है, अगर उसके कुछ जान पहचान वाले, जेयलौसी या दूसरी मानवीय कमियों की बजह से उसको discourage करें तो भी वो काम रुकने वाला नहीं होता। वो करने वाले की मेहनत और energy ने करना है, और वो होकर ही रेहता है। ऐसी मेरे पास कई एक्जाम्पल हैं।

पहली एक्जाम्पल मैं खुद पर लेकर दे रहा हूँ।
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हमारे एक पुराने मेम्बर हैं, जो हरेक कमेटी में, हरेक किट्टी में, 1 नहीं, कई कई मैम्बरशिप लेकर शामिल होते हैं।
जब हम पहली बार मिले तो उन्होने एमआई लाइफ स्टाइल मार्केटिंग का काम शुरू शुरू किया था। सिम्पल से स्कूटर पर मिलते होते थे। लेकिन मेरी नेगेटिव सोच। की इसमें इंका ज्यादा फ़ायदा होगा/है, तो ही मुझे कह रहे हैं। और मेरे मेम्बर बनने से इनको ज्यादा फ़ायदा मिलेगा। मुझे कम। तो मैं इंका ज्यादा फ़ायदा करने की बजह क्यूँ बनूँ?

धीरे धीरे वो तरक्की करने लगे। लेकिन मैं उनके साथ नहीं जुड़ा।
फिर उन्होने जबर्दस्त तरक्की की। बड़ी गाड़ी, बड़ा घर। मैं नहीं जुड़ा।
फिर वो चंडीगढ़ शिफ्ट हो गए। बढ़िया स्कूल। बढ़िया फ्लॅट। मैं नहीं जुड़ा।
फिर उनके बच्चों का दिल न लाग्ने के कारण वो वापिस भटिंडा आ गए। लेकिन अब अक्सर उनके बड़े बड़े सहरों में बड़े बड़ी प्रोग्राम लाग्ने लग गए। इतने बड़े की बड़े बड़े होटलस के हाल भी छोटे पड़ने लग गए। मैं नहीं जुड़ा।
अब उनके लैक्चर को सुनने के लिए इतने लोग तरसने लग गए की अगर कोई नेगेटिव सोच वाला बंदा हो तो जेयलौसी से ही मर जाये।
और आज उनके नीचे लगे हुए लोगों को 15 लाख महीने तक की इंकम है। और उनकी इंकम का तो कोई हिसाब ही नहीं। लेकिन मैं, इस तरह से मैं आज तक भी उनसे जुड़ नहीं पा रहा था (लेकिन आज उन्होने मेरी आईडी मेरे से बिना पूछे ही लगा दी)।

कुछ यूं ही हमारे साथ हुआ। हमने ग्रुप शुरू किए तो हमारे कुछ खास बंदे, जुड़ना पसंद नहीं कर रहे थे। उनको लग रहा था की इस फ्री की चीज़ में भी बॉबी और उनकी टीम का कुछ एक्सट्रा फ़ायदा होगा।
फिर ग्रुप चल निकले और कुछ वर्षों बाद, हमने महीने की 20 रूपीस फीस रख दी। फिर भी मेरे कुछ दोस्त, किसी न किसी बहाने से परे परे।

और आज जब हमने नैक्सट स्टेप ले लिया और खुद का प्लैटफ़ार्म बन गया बठिंडा का, आज भी कुछ मित्रों को लगता है की अगर वो इस प्लैटफ़ार्म पर पोस्ट डालेंगे तो यह प्रोमोट होगा, और इससे बठिंडा हेल्पर को फ़ायदा होगा।

लेकिन वो यह नहीं सोचते की बठिंडा हेल्पर की टीम को कोई फ़ायदा हो न हो, उनको ख़ुद को तो फ्री में बड़ी आडियन्स, एक बेहतर प्लैटफ़ार्म मिल रहा है न?

मुझे यकीन है, सिर्फ 2 से 3 महीनों में, वही दोस्त, खुद ब ख़ुद, सभी अड़चनों को भूलकर, मेरे बिना कहे, हमारे दूसरे (इसके मुक़ाबले बेकार) प्लात्फ़ोर्म्स को छोड़कर, यहाँ पर सबसे पहले पोस्ट डाला करेंगे। लेकिन निश्चित ही, जो आज हमारे कहने पर यहाँ एक्टिव होते हैं, उनके लिए मन में एक एक्सट्रा जगह बन जाती है, वो दोस्त नहीं भूलते जो किसी के कहने पर कुछ कर लेते हैं। मैं खुद उपर वाले case में उनके कहे भी कर नहीं पाया (क्यूंकी उसमें मुझको थोड़ा टाइम/मनी इन्वेस्ट और थोड़ी एफर्ट करनी पड़नी थी)।

तो दोस्तो, हममे से कुछ लोग पीछे रह जाते हैं। और कुछ initiative लेने वाले आगे।
जैसे की हमारे संजय सिंह जी आगे निकल गए। और हम पीछे। :expressionless::expressionless:

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हैलो बठिंडा!