ममता दीदी के साथ भाजपा द्वारा बदसुलूकी क्यों की जा रही है?

अगर 1000 लोग झूठ का प्रचार करें तो झूठ सच नही हो जाता। बंगाल और केरेल, ये 2 ऐसे राज्य है जहाँ भाजपा ने अपने कई सारे स्वयं सेवकों को मरते हुए देखा है। जब भी ममता और सीपीआई/सीपीएम की सत्ता पे खतरा आया है इन्होने हिंसा का सहारा लिया है। ममता अभी बौखलाई हुई है, उन्हें उम्मीद नही थी की भाजपा ऐसे उठेगी और वामपंथियो के वोट अपने झोले में ले लेगी।

अब उल्टी गिनती शुरू हो गयी है। जहाँ पे सारे मिडिया और दल एक ही दल के ख़िलाफ़ बोले तो दाल मे काला लगता है। जो ममता NRC का कभी समर्थन करती थी, वही ममता आज वोट बचाने के लिए उसके खिलाफ है। बंगाल से हिन्दू कब के साफ हो गये होते (कम कम से कुछ भागो से)।

ऐसा पहली बार नही है की हिन्दू के ख़िलाफ़ कदम उठाए जा रहे है। भारतीय राजनीति में हिन्दू को बहुत ऐहमीयत नही दी जाती थी क्युँकि हिन्दू को जाती के नाम पे असानी से तोड़ा जा सकता है। पर आज हिन्दू बड़ी मात्रा में एक दल के पीछे संगठित खड़ा है, इस बात को कोई भी पचा नही पा रहा है। हिन्दू के ख़िलाफ़ हुए अत्याचारों को आज आवाज़ मिल रही है, अपने आप को सेक्युलर कहने वालो का सही चहरा दिख रहा हैं। किसी धर्म के लोग भाजपा को वोट न करने का अनुरोध करते है, क्या बोल के की, BJP उन्हें बंगाल से बाहर भेज देगी। पर अगर NRC के विधि से किसी का वोट देने का अधिकार छीनता है तो किसको तकलीफ़ होनी चाहिए।?

अभी तक कहीं भी नही आया है कि NRC मे जो नाम नही आया है उन्हें देश से बाहर भेज दिया जाएगा, पर उनके पास citizen exclusive rights नहीं होगा। दूसरा कदम है citizenship bill जिसके तहत मुसलिम के अलावा, बांग्लादेश, पाकिस्तान अफगनिस्तान के दूसरे धर्मों के पीड़ितों को नागरिकता दी जाएगी, अब इसमे सबसे ज्यादा फायदा हिन्दू का ही है, पर क्या यह साम्प्रदायिक मुद्दा है? मेरा मानना तो यही है कि ये साम्प्रदायिक मुद्दा नही है, हजारों सालों से भारत ही हिन्दू का घर रहा है, अब घर का बच्चा कहीं भी बाहर काम करने जाये और तकलीफ़ मे कहाँ जाएगा? अब आजादी के बाद विभाजन हुआ और जो हिन्दू बाहर गये उन्हें हमेशा के लिए बाहर कर दिया, अब वो तकलीफ़ मे है तो क्या हमे उनके साथ नही खड़े होना चाहिए। दूसरा कारण, साम्प्रदायिक नही है क्योंकि ईसाई धर्म के अनुयाईयों को भी citizenship bill का फायदा है।

अब ये सब जो कदम उठाए गये है उनसे हिन्दू संगठित हो रहा है और ये जातिवाद कि राजनिति को खतरा है और वोट बैंक की राजनिति को खतम कर देगी। सालों से जिस गरम तवे पे रोटियां सेकी है वो ठंडा हो रहा है। ऐसा होने पे जाती और धर्म की राजनिति करने वालो का बतसूरत चहरा सामने आ सकता है। अब सब इसीलिए संगठित हो रहे है।

Remembering Gopal Mukherjee, The Braveheart Who Saved Calcutta In 1946

हैलो बठिंडा!