Whatsapp and Telegram?? Which is better?

व्हात्सप्प और टेलेग्राम के आपसी फ़र्क

जो लोग मेरी तरह ज्यादा सिन्सियर टाइप के msgs चाहते हैं और व्हात्सप्प पर वही सेम msgs अलग अलग लोगों से, ग्रुप में प्राप्त कर कर के थक चुके हैं। उनके लिए मैं आप लोगों को नीचे लिखे कुछ नई बातें बताना चाहूँगा।

  • अगर आप व्हात्सप्प की इंस्टेंट messaging से खुश हैं। की कैसे यह तुरुन्त खुलता है बिना एक भी सेकंड के विलंभ से। कैसे तुरुन्त, स्पीड से msgs भेज पाते हैं, और कैसे रिसीव कर पाते हैं तुरुन्त।
  • ज़्यादातर केसेस में हमें यह भी पता चल जाता है की सामने वाले ने यह msgs देख लिए हैं या नहीं? कब देखे हैं? या अगर नहीं देखे तो वो लास्ट ऑनलाइन कब था? यह सब बातें हमें, हमारे बिज़नस को भाती हैं।
  • इसके इलावा, कितनी आसानी से हम किसी को कोई भी कांटैक्ट नंबर, कोई भी फोटो, अपनी लोकेशन आदि भेज सकते हैं?
  • कितनी आसानी से ग्रुप्स से जुड़ सकते हैं, निकल सकते हैं। जिसको हम पसंद नहीं करते, उसको ब्लॉक कर सकते हैं।
  • Msg का मैटर कॉपी कर सकते हैं। फॉन्ट कितने साफ हैं?
  • और कितनी आसानी से एक मिनट में इन्स्टाल होकर चल जाता है। कोई ईमेल देने का या verification का झंझट नहीं।
  • और कैसे यह दूसरे सभी के पास है? लगभग हमारे हरेक कांटैक्ट के पास व्हात्सप्प है।

अब अगर मैं यह कहूँ की लगभग यही सब कुछ एक टेलेग्राम एप में भी है।
सिर्फ 1-2 बातें ऐसी हैं जो टेलेग्राम में नहीं हैं।
लेकिन उसकी बजाय टेलेग्राम में ऐसी कई बातें, कई गुण हैं, जो व्हात्सप्प में नहीं हैं।

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पहले टेलेग्राम के नुक्सान:

  • टेलेग्राम व्हात्सप्प जितनी प्रचलित नहीं है। हो सकता है की वो सामने वाले ने इंस्टॉल न कर रखा हो।
  • टेलेग्राम ग्रुप्स में आप यह नहीं देख सकते की किस मेम्बर ने msg पढ़/देख लिया है, किस नें नहीं।

टेलेग्राम के फ़ायदे, अगली पोस्ट में

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टेलेग्राम के फ़ायदे

  • सबसे पहली बात, हमारा ‘लास्ट सीन’ किसी को exact नहीं दिखेगा। वो (व्हात्सप्प की तरह) यह तो देख पाएगा की हमने उसका msg पढ़ लिया है या नहीं। लेकिन exact टाइम जब हम लास्ट ऑनलाइन थे, वो नहीं देख पाएगा। उसकी बजाय उसको दिखेगा की हम ‘रिसेंट्लि’ यानी ‘हाल ही में’ ऑनलाइन थे। लेकिन अगर हम इसी वक़्त ऑनलाइन हैं, तो सबको ‘ऑनलाइन’ दिखेंगे। आप ध्यान से सोचेंगे तो आप पाएंगे की इस feature का फ़ायदा हरेक को है और नुकसान किसी को नहीं।

  • इस पर व्हात्सप की तरह फ़ालतू के कोई ग्रुप्स नहीं हैं। यानी वही msgs रोज, अलग अलग ग्रुप्स में मिलने से तुरंत छुटकारा। आपकी जिससे भी बात होगी, वो बहुत ही मीनिंग फूल होगी।

  • इसके इलावा व्हाट्सप्प में जो ब्रोडकास्ट लिस्ट होती हैं, जिसमें हम अपने 200 कान्टैक्ट को एक साथ msgs भेज सकते हैं, लेकिन वो वापिस केवल हमें ही भेज पाएंगे, सभी 200 मेम्बर्स को नहीं। उसकी जगह, या उसके जैसे ही टेलग्रैम चैनल होते हैं। उसकी कपैसिटी अनलिमिटेड होती है। और उसको बनानेवाला तय करता है की सभी मेम्बर भी उसमें msgs कर पाएंगे या सिर्फ देख ही पाएंगे। यानी टेलग्रैम ने ग्रुप और ब्रोडकास्ट लिस्ट को मर्ज करके टेलग्रैम चैनल बना दिए। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है की हरेक बंदे के इन्टरिस्ट के मुताबिक सेकड़ों टेलग्रैम लिस्ट हैं, जो आप कभी मर्जी सर्च करके जॉइन कर सकते हैं। और इन लिस्ट के मेम्बर लाखों तक भी होते हैं कई बार।

  • उद्धरण के लिए, जिसको फिल्मों में इन्टरिस्ट है, वो फिल्मी चैनल लिस्ट जॉइन कर लेगा, तो उसको हर टाइम नई नई फिल्म्स के लिंक मिलते रहेंगे। जो बच्चा अपनी स्टडी में इन्टरिस्टिड है, उसको स्टडी मटीरीअल मिलता रहेगा, फ्री में। और जो बंदा कंप्युटर सॉफ्टवेयर में इन्टरिस्टिड हैं, उसको फ्री सॉफ्टवेयर के लिंक मिलते रहेंगे। जो बंदा धार्मिक चीजों में इन्टरिस्ट रखता है, उसको धार्मिक मटीरीअल मिलता रहेगा।

  • यानी की आपने सारी दुनिया की और आपने एक विंडो खोल ली। और इतने ज्यादा मेम्बर होने के बाद भी आप पाएंगे की कोई बकवास रिपीट msg आपको उनमें नहीं मिलेगा। सबकुछ बड़ा साफ़।

  • न केवल इन्स्टाल होने के टाइम में भी टेलग्रैम एप व्हाट्सप्प एप के मुक़ाबले लगभग आधी स्पेस लेती है। बल्कि इसके बाद जैसे व्हाट्सप्प आपके मोबाईल की इन्टर्नल मेमोरी को इस तरह से भरना शुरू करता है की इंसान पागल हो जाता है (उसके मोबाईल की सारी स्पेस सिर्फ व्हाट्सप्प ही खा जाता है, और कार्ड में शिफ्ट भी नहीं होता)। टेलग्रैम के सभी msgs इसके खुद के सर्वरस पर रहते हैं। जिसके कारण आपका मोबाईल 1 mb भी नहीं भारत।

  • अपने इसी कारण की बजह से, टेलग्रैम जब मर्जी अनिन्स्टाल करके, दोबारा इंस्टॉल करिए, आपके सभी msgs वैसे के वैसे ही मिल जाएंगे। कोई बैकअप लेने की, या रेस्टोर करने की जरूरत नहीं। ये अकेला पॉइंट ही लाइफ सैवर प्रूव होता है कई बार!!

  • अगर आप कोई फोटो व्हात्सप्प पर भेजेते हैं, तो आपको पता नहीं चलता, लेकिन व्हात्सप्प उसकी क्वालिटी बहुत ही कम कर देता है। आप अपने कैमरा से कोई फोटो खींचिए, और उस फोटो को मुझे (947878400 पर) या अपने किसी दोस्त को टेलेग्राम पर भेजिये। और फिर वही फोटो व्हात्सप्प पर भी भेजिये। फिर उसको दोनों में ओपेन कीजिये। आप फ़र्क देखकर हैरान हो जाएंगे।

  • इसके इलावा आप टेलेग्राम में ऐसे ग्रुप भी शुरू कर सकते हैं, या जॉइन कर सकते हैं, जिनमें सिर्फ लोकल, आपके आसपास वाले लोग ही जॉइन कर पाएंगे, उस ग्रुप को देख पाएंगे। इसका डायामीटर कैसे निर्धारित होता है, यह अभी मुझे भी नहीं मालूम। लेकिन अभी मैंने जो Bathinda Helper Local Group के नाम से लोकेशन बेस्ड ग्रुप शुरू किया हुआ है, उसमें बठिंडा के लोग अपने आप एड़ हो पा रहे हैं। ऐसी चीज़ व्हात्सप्प पर बिलकुल भी नहीं है, की जो आपके नजदीक रहते हों, वो ही लोग एड़ हो पाएँ।

  • एक और फ़ायदा यह है की टेलग्रैम की एक ही एप करके आप उसमें अपने सभी नंबर ऐड कर सकते हैं। उसके बाद उसी एप में जब मर्जी एक अकाउंट/नंबर से निकल कर दूसरे में प्रवेश कर जाएँ।

  • और क्यूंकी इसकी मैम्बरशिप अनलिमिटेड है, इसमें आप अपने बिज़नस के लिए भी ग्रुप बना सकते हैं। फेस्बूक ग्रुप्स में आपको मेम्बर तो हजारों दिख जाएंगे, पर काम के उसमें से 5 परसेंट भी नहीं मिलेंगे। लेकिन यहाँ, यहाँ जीतने मेम्बर आपको जॉइन करेंगे, उसके 80% आपके हरेक msg को ध्यान से पढ़ेंगे, देखेंगे, ऐसा मेरा एक्सपिरियन्स है।

  • और एक बार, जो आप लोगों में से कई लोग यकीन ही नहीं करेंगे। व्हाट्सप्प आपके सभी msgs को पार्स करता है, देखता है, चेक करता है। तो उसमें जब इसको कोई ऐसा लिंक दिखता है, जो फेस्बूक (व्हाट्सप्प की मालिक कंपनी) को लगता है की यह उसके कम्पेटिटर का लिंक है (जैसे की कोई ऐसा वेबसाईट, जिस पर चैट आदि होती है और फेस्बूक को लगता है की वो उसके यूजर को खींचता है) तो फेस्बूक उस लिंक को करप्ट कर देता है। और जब टारगेट यूजर वो लिंक ओपन करता है तो वो वेबसाईट/लिंक खुलता नहीं। अगर तो वो यूजर जिद्दी हुआ और कई बार ट्राइ करता रहा, या फिर उस लिंक को मानुयाली कॉपी करके अपने ब्राउजर में पेस्ट करके ओपन किया, तो ही खुलेगा। वरना नहीं। यह बातें आम यूजर को पता नहीं और वो अनजाने में अपना सर खपा कर छोड़ देता है। की कहीं कोई और दिक्कत होगी।

  • इसके इलावा, टेलग्रैम का इक्स्पीरीअन्स भी व्हाट्सप्प की तरह बहुत ही ज्यादा स्मूद है। हालांकि यह आपके मोबाईल की इन्टर्नल मेमोरी से नहीं चलता और उस बजह से यह थोड़ा सा स्लो होना चाहिए। पर नहीं है, बाबजऊद आपके घर में इसको कोई स्पेस न मिलने के, ये पूरा फास्ट दोड़ता है। टॉप क्वालिटी की फ़ोटोज़ आदि देता है।

  • इसके इलावा जीतने स्टिकर, एमोजी, आदि इसमें मिलते हैं, व्हाट्सप्प में जीवन भर नहीं मिलेंगे। मजा आ जाता है ऐनमैटिड स्टिकर use करके। आप एक बार use करेंगे तो ही पता चलेगा।

अगर आप बठिंडा हेल्पर वेब एप की सभी नोटिफ़्स टेलेग्राम एप पर तुरंत प्राप्त करना चाहते हैं तो यह telegram लिस्ट जॉइन कर लीजिए: Telegram: Contact @BathindaHelper

कुल मिलाकर बात यह है की जिसने एक बार टेलग्रैम use करना शुरू कर दिया, उसको सिर्फ ग्रुप में पता नहीं चलेगा की किस किस ने msg रीड कर लिया है किसने नहीं, उसके इलावा वो जैसे जैसे use करेगा, सब चीजों का मज़ा आता जाएगा। व्हाट्सप्प की तरह फालतू msgs से तुरुन्त छुटकारा।

#telegram vs whatsapp
#whatsapp vs telegram

अगर आपका कोई भी प्रश्न हो यहीं पर रिप्लाइ करेंगे तो मैं जबाब दूंगा।

हैलो बठिंडा!